जियोफाइबर बना सबसे बड़ा ब्रॉडबैंड प्रोवाइडर, 60 लाख से अधिक घरों में पहुंचा जियोफाइबर

जियोफाइबर बना सबसे बड़ा ब्रॉडबैंड प्रोवाइडर, 60 लाख से अधिक घरों में पहुंचा जियोफाइबर

नई दिल्ली:- रिलायंस जियो के नेटवर्क पर डेटा की खपत में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी रिजल्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2021-22 में कंपनी के नेटवर्क पर ग्राहकों ने 91.4 अरब जीबी डेटा का इस्तेमाल किया। 2022 के पहले तीन महीनों में यह 24.6 अरब जीबी के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। जो पिछली तिमाही से 47.5% अधिक था। इस भारी भरकम डेटा को खर्च करने में एक ग्राहक ने औसतन प्रतिमाह 19.7 जीबी डेटा का इस्तेमाल किया।

चौथी तिमाही में ग्राहकों ने जियो नेटवर्क पर बातचीत करने का नया रिकॉर्ड कायम किया। हर ग्राहक ने जियो नेटवर्क पर प्रति महीने औसतन 968 मिनट बात की यानी करीब 32 मिनट रोजाना। पिछले साल के मुकाबले जियो नेटवर्क वॉयस ट्रैफिक 17.9% बढ़कर 4,51,000 करोड़ मिनट जा पहुंचा।

उधर लॉन्च के 2 साल के भीतर ही जियोफाइबर देश का सबसे बड़ा ब्रॉडबैंड सर्विस प्रोवाइडर बन गया है। करीब 50 लाख घरों सहित जियोफाइबर ने 60 लाख से अधिक परिसरों को अपने नेटवर्क से जोड़ लिया है। घरों में पिछले वित्त वर्ष जितने ब्रॉडबैंड कनेक्शन लगाए गए उनमें से दो तिहाई जियोफाइबर के थे।

कंपनी के मुताबिक जियो ने 5 जी लॉन्च की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसके लिए जियो ने 8 राज्यों के कई शहरों में व्यापक फील्ड ट्रायल किए है। इन परीक्षणों में पीक यूजर थ्रूपुट 1.5Gbps से अधिक रहा। मल्टी-वेंडर इंटरऑपरेबिलिटी और इंटरवर्किंग पर भी काम किया जा रहा है।

औसत रेवन्यू प्रतियूजर (ARPU) के मामले में भी कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का आरपू जनवरी से मार्च 2022 की चौथी तिमाही में 167.6 रु रहा। चौथी तिमाही में रिलायंस जियो का स्टैंडअलोन लाभ 24 प्रतिशत बढ़ कर 4,173 करोड़ रुपए जा पहुंचा। कंपनी ने एक साल पहले इसी अवधि में 3,360 करोड़ रुपये का प्रोफिट ऑफ्टर टैक्स यानी कर पश्चात लाभ दर्ज किया था।

31 मार्च, 2022 को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए रिलायंस जियो का कंसोलिडेटेड प्रोफिट ऑफ्टर टैक्स वित्त वर्ष 21 में 12,071 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 23 प्रतिशत बढ़कर 14,854 करोड़ रुपये हो गया। स्टैंडअलोन रेवेन्यू में भी कंपनी ने रिकॉर्ड बनाया है। कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू मार्च 2022 में 20 प्रतिशत बढ़कर 20,901 करोड़ रुपय हो गया इससे पहले मार्च 2021 में यह 17,358 करोड़ रूपये था।

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