जनता सीएम धामी के कड़क फैसलों से खुश, आपात स्थिति में मिले पीड़ितों के साथ खड़े

जनता सीएम धामी के कड़क फैसलों से खुश, आपात स्थिति में मिले पीड़ितों के साथ खड़े

देहरादून:- मुख्यमंत्री धामी के कड़क फैसलों से उनके विरोधियों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गयी है। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड मंें सामने आए कई प्रकरण में ठोस फैसले लिए हैं, जिनका प्रदेश की जनता पर तो असर हुआ ही है साथ ही सीएम ने यह भी जता दिया है कि हर परिस्थितियों में वह कड़े फैसले लेने की दम रखते हैं। सीएम के इन फैसलों का असर हरिद्वार के पंचायत चुनावों में भी देखने को मिला है। इस सत्यता से अब इंकार नहीं किया जा सकता है कि हरिद्वार पंचायत चुनाव में भाजपा की जीत का एक प्रमुख कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा पिछले कुछ समय में लिए गए ऐसे निर्णय भी माने जा रहे हैं जिसन आमजन के बीच उनकी छवि को एक अलग रूप में प्रदर्शित किया।

निश्चित तौर पर धामी के इन फैसलों से उन लोगों के पैरों तले जमीन खिसकी हीै जो गाहे-बगाहे उनके काम करने की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं या फिर अभी भी सत्ता पाने की अपनी महतवकांक्षांओं को जगाए हुए हैं। विरोधियों को यह मान लेना चााहिए कि मुख्यमंत्राी धामी को प्रदेश की जनता स्वीकार कर चुकी है, और उनके उनके द्वारा लिए गए फैसलों से कहीं न कहीं सहमत भी हैं। हालांकि यह उम्मीदें अभी बलवती हैं कि अंकिता हत्यकांड एवं नकल प्रकरण में कुछ और कड़े फैसले सीएम ले सकते हैं।

मुख्यमंत्री धामी के कड़े फैसलों का असर हरिद्वार के पंचायत चुनाव में भाजपा की जीत के पीछे निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री धामी के कड़क फैसले भी एक खास कारण बने हैं। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व वाली सरकार में हरिद्वार की अग्नि परीक्षा में धामी बाजी मारने में कामयाब रहे हैं। मुख्यमंत्री ने खुद पंचायत चुनावों को लेकर हरिद्वार के लोगों की नब्ज टटोली थी और उनके इस त्वरित फैसले का लाभ पार्टी को भी मिला। उत्तराखंड में भर्ती परीक्षा घोटाला हो या फिर विधानसभा में बैक डोर से हुई नियुक्तियों का मामला या फिर अंकिता हत्याकांड। मुख्यमंत्री धामी ने इन सभी मामलों में राजनीतिक प्रभाव की परवाह न करते हुए बेबाक फैसले लिए जिसे उत्तराखंड की पूरी जनता ने सराहा भी।

निश्चित तौर पर हरिद्वार में भी उनके इन फैसलों का असर लोगों के मतदान के रूप में देखने को मिला खासतौर से अंकिता हत्याकांड के आरोपी के पिता एवं भाई को ना केवल दायित्व से हटाया गया बल्कि पार्टी से भी चलता किया गया।

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