आज प्रयागराज में प्रधानमंत्री मोदी का आगमन , शंखध्वनि और शहनाई बजाकर किया जायेगा उनका स्वागत

आज प्रयागराज में प्रधानमंत्री मोदी का आगमन , शंखध्वनि और शहनाई बजाकर किया जायेगा उनका स्वागत

उत्तर प्रदेश: प्रयागराज में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी का आज आगमन होगा। उनका परेड मैदान में कार्यक्रम है। परेड मैदान में आने वाली सभी महिलाओं के स्वागत के लिए भाजपा की तरफ से जगह-जगह मंच सजाए गए हैं। शंखध्वनि, शहनाई और तुरुही बजाकर उनका स्वागत होगा। इसके अतिरिक्त नगाड़ा और डमरू भी बजता रहेगा। उत्साही कार्यकर्ताओं की टोली हर हर महादेव, भारत माता की जय, गंगा मैया की जय, बजरंग बली की जय का उद्घोष भी करेगी।

50 बटुक स्‍वस्ति वाचन करेंगे

भाजपा महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी ने बताया कि स्वस्ति वाचन के लिए 50 बटुक रहेंगे। इस आयोजन में सहभागिता के लिए तीर्थ पुरोहितों की टीम सहयोग में जुटी है। क्षेत्रीय विधायक व अन्य पदाधिकारी इन सभी व्यवस्थाओं का जायजा लेते रहेंगे। 30 महिला कार्यकर्ता प्रधानमंत्री के मंच के पास मौजूद रहेंगी। वह सभी निगरानी के साथ महिलाओं के लिए पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था व अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति का मार्गदर्शन आदि में सहयोगी की भूमिका निभाएंगी।

काशी से मंगवाया गया माला-फूल

आयोजन को भव्य बनाने के लिए शहर को कमलमय करने की तैयारी है। महानगर अध्यक्ष ने बताया कि 20 हजार झंडे, पांच हजार स्वागत होर्डिंग लगाई गई है। इन होर्डिंगों में केंद्र और प्रदेश के कार्यों को भी बताया जाएगा। मंडल स्तर के पदाधिकारी व कार्यकर्ता स्वयं इस बैनर व झंडों को लगाएंगे। संगठन का सख्त निर्देश है कि श्रमिकों को लगाकर झंडे आदि न लगवाए जाएं। यदि कार्यकर्ता स्वयं लगाएंगे तो वह आयोजन से खुद को जोड़ पाएंगे। प्रधानमंत्री व स्वागत मंचों को सजाने के लिए काशी से तीन टन माला फूल मंगवाया गया है। कार्यक्रम स्थल के निकट के सभी चौराहों को भी सजाया गया है।

स्वागत मंचों पर बिखरेगी काशी कारीडोर व श्रीराम मंदिर की छटा

मातृशक्तियों के स्वागत के लिए बनने वाले तमाम मंचों को सुरुचिपूर्ण ढंग से सजाया गया है। इन मंचों पर काशी कारीडोर के विभिन्न चित्र, अयोध्या में श्रीराम मंदिर के शिलान्यास की यादों को ताजा करने वाले चित्र भी रहेंगे। इसके अतिरिक्त कुंभ में प्रधानमंत्री द्वारा स्वच्छा ग्रहियों के पांव पखारने के चित्र भी रहेंगे जिससे उन पलों को लोगों के मानस पटल पर दोबारा उभारा जा सके।

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