एटीएफ की बढ़ती कीमत चालू वित्त वर्ष में उड्डयन उद्योग के कारोबार पर बड़ा असर डाल सकती हैं

एटीएफ की बढ़ती कीमत चालू वित्त वर्ष में उड्डयन उद्योग के कारोबार पर बड़ा असर डाल सकती हैं

नई दिल्ली: निवेश सूचना एवं क्रेडिट रेटिंग सेवाएं देने वाली एक फर्म के अनुसार रूस-यूक्रेन संघर्ष से विमानन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में तेजी, इस समय विमानन सेवा क्षेत्र की दशा में सुधार की प्रक्रिया के सामने बड़ा खतरा बनकर खड़ी हुयी है।

इंवेस्टमेंट इंफोर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया (इकरा) ने जारी एक रिपोर्ट में कहा है, मई 2022 में एटीएफ की कीमतों में वार्षिक आधार पर 89 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है। रूस के यूक्रेन पर हमले के कारण उत्पन्न भू-राजनैतिक तनावों के चलते कच्चे तेल के दामों में उछाल आया है जिससे व्यवसाय जगत के सामने चुनौतियां पैदा हुयी हैं।

इकरा के उपाध्यक्ष और क्षेत्र प्रमुख सुप्रीयो बनर्जी ने कहा, उड़ानों का औसत दैनिक प्रस्थान अप्रैल 2022 में 2,726 रहा जो अप्रैल 2021 में 2,000 के औसत दैनिक प्रस्थान से अधिक है। मार्च 2022 में यह 2,588 था। गत 27 मार्च को भारत से अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए नियमित उड़ानें शुरू होने और विभिन्न देशों के साथ उड़ानों की क्षमता के बारे में द्वपक्षीय समझौतों के संसोधन के बाद अप्रैल में भारतीय एयरलाइन कंपनियों ने अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 18.5 लाख यात्रियों को सेवाएं दी। अप्रैल 2019 में यह संख्या 18.3 लाख थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, एटीएफ की बढ़ती कीमत चालू वित्त वर्ष में उड्डयन उद्योग के कारोबार पर बड़ा असर डाल सकती हैं। सामान्य स्थिति बहाल होने पर कुल मिलाकर विमानों में भरी सीटों का अनुपात सुधरेगा जिससे एयरलाइन कंपनियों के राजस्व में सहायता मिलेगी। लेकिन वित्त वर्ष 2022-23 में एटीएफ की कीमतों में तेजी का भारतीय विमानन कंपनियों की आय पर असर होगा।

रेटिंग्स एजेंसी ने कहा कि अप्रैल 2022 में घरेलू विमान यातायात कोरोना से पहले के समय की तुलना में पांच प्रतिशत कम रहा पर माह के दौरान घरेलू एयरलाइनों की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यात्रियों की संख्या कोरोना से पहले के स्तर को पार कर गयी।

घरेलू मार्गों पर विमान यात्रियों की संख्या अप्रैल 2022 में एक साल पहले इसी माह की तुलना में 83 प्रतिशत बढक़र 1.05 करोड़ रही और यह कोरोना के पूर्व के समय से सिर्फ पांच प्रतिशत कम है। अप्रैल 2019 में यह संख्या 1.1 करोड़ थी। इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 18.5 लाख रही जो कोरोनाकाल से पूर्व की संख्या को पार कर चुकी है।

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