इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन में सीटें पड़ी कम, सीएम ने सबक लेते हुए कि 10 हजार की क्षमता का कन्वेंशन सेंटर बनाने की घोषणा

इंदौर में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन में सीटें पड़ी कम, सीएम ने सबक लेते हुए कि 10 हजार की क्षमता का कन्वेंशन सेंटर बनाने की घोषणा

मध्य प्रदेश: इंदौर में प्रवासी भारतीयों का सम्मेलन सफल रहा। टीस रह गई तो इतनी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के दौरान कई विदेशी मेहमानों को हॉल में जगह नहीं मिली। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मंच से दो बार माफी भी मांगनी पड़ी। इससे सबक और संकल्प लेते हुए मुख्यमंत्री ने इंदौर के सुपर कॉरिडोर पर दस हजार लोगों के बैठने की क्षमता वाला कन्वेंशन सेंटर बनाने की घोषणा की है। इंदौर विकास प्राधिकरण ने इसके लिए तैयारियां भी तेज कर दी हैं। अधिकारियों की माने तो यह देश का दूसरा बड़ा कन्वेंशन सेंटर होगा।

ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) को यह टारगेट दिया है। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में कहा कि अब यह जगह छोटी पड़ने लगी है। हमें बड़े कन्वेंशन सेंटर की जरूरत है। इसके लिए आईडीए को दस हजार सीटों की क्षमता वाला कन्वेंशन बनाने पर काम शुरू करना चाहिए। इस मसले पर आईडीए के सीईओ आरपी अहिरवार ने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा को अमलीजामा पहनाया जाएगा। सुपर कॉरिडोर पर जगह चुनने और प्लान बनाने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त किया जाएगा। यह नया कन्वेंशन सेंटर दस हजार सीटिंग क्षमता वाला होगा।

प्रवासी भारतीय सम्मेलन में यह हॉल छोटा पड़ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुनने के लिए प्रवासी भारतीय उत्सुक थे। हॉल की क्षमता दो हजार लोगों के बैठने की थी, जबकि रजिस्ट्रेशन साढ़े तीन हजार से अधिक थे। इस वजह से कई प्रवासियों को बाहर मेगा स्क्रीन पर ही अपने पसंदीदा नेता को देखना पड़ा। उनमें इस बात को लेकर गुस्सा था। इस वजह से मुख्यमंत्री ने पीएम के सामने ही कहा कि हॉल छोटा पड़ गया, लेकिन हमारे दिल में स्नेह कभी कम नहीं पड़ेगा। अगले ही दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रवासी भारतीय सम्मेलन का समापन किया, तब मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता ही ऐसी है कि हॉल छोटा पड़ गया। मैं प्रवासी भारतीयों से दोनों हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं।

प्रवासी भारतीय सम्मेलन और ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के सफल आयोजनों से यह तो साबित हो गया कि मध्यप्रदेश में सिर्फ इंदौर ही एक ऐसा शहर है, जहां इस तरह के बड़े आयोजन संभव है। अन्य शहरों में तैयारियों में बहुत खर्च करना पड़ता, लेकिन इंदौर में ज्यादातर व्यवस्थाएं पहले से मौजूद है। ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजन तो हो गए, लेकिन सीटिंग क्षमता की वजह से राज्य सरकार को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। अब इससे सबक लेते हुए मुख्यमंत्री ने जो संकल्प लिया है, वह कई मायनों में इंदौर की साख को बढ़ाएगा।

इंदौर में दस हजार की सीटिंग क्षमता वाला कन्वेंशन सेंटर आकार लेते ही देश का दूसरा बड़ा कन्वेंशन सेंटर हो जाएगा। दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर इस समय देश का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर है, जहां एक साथ 11 हजार लोग बैठ सकते हैं। पिछले साल अप्रैल में रिलायंस इंडस्ट्री ने मुंबई में देश का सबसे बड़ा जियो वर्ल्ड सेंटर बनाने की घोषणा की थी, जो 18.5 एकड़ में फैला होगा। यह अगले साल तक साकार होगा। इसकी बैठक क्षमता का खुलासा अभी नहीं किया गया है। अन्य बड़े शहरों की बात करें तो मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरू में भी दो से पांच हजार की सीटिंग क्षमता वाले कन्वेंशन सेंटर है, जो काफी पहले बने थे। अधिकारियों का दावा है कि इंदौर का कन्वेंशन सेंटर अत्याधुनिक होगा और इसमें सभी सुविधाओं को जोड़ा जाएगा।

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