स्वच्छता पुरस्कार पाने के बावजूद अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट खुलेआम जलाया जा रहा है। साथ ही किसी अस्पताल में एम्बुलेंस चलाने को ड्राइवर नहीं तो कहीं पीने के पानी और सफाई का संकट है, ऐसे में सरकार के तमाम दावे हो रहे खोखले

स्वच्छता पुरस्कार पाने के बावजूद अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट खुलेआम जलाया जा रहा है। साथ ही किसी अस्पताल में एम्बुलेंस चलाने को ड्राइवर नहीं तो कहीं पीने के पानी और सफाई का संकट है, ऐसे में सरकार के तमाम दावे हो रहे खोखले

देहरादून:- उत्तराखंड के जिन सरकारी अस्पतालों को कायाकल्प पुरस्कार से नवाजा गया, उनमें से कई जगह मरीज इलाज को तरस रहे हैं। किसी जिला अस्पताल में महीनों से ऑपरेशन ठप हैं तो किसी में स्वास्थ्य जांच नहीं हो पा रही हैं। स्वच्छता पुरस्कार पाने के बावजूद अस्पतालों में मेडिकल वेस्ट खुलेआम जलाया जा रहा है। साथ ही किसी अस्पताल में एम्बुलेंस चलाने को ड्राइवर नहीं तो कहीं पीने के पानी और सफाई का संकट है। ऐसे में सरकार के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं।

रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल में दो महीने से एनेस्थेटिस्ट न होने से आपरेशन ठप हैं। दो महीने से महिला रोग विशेषज्ञ भी नहीं है, इससे गर्भवतियों की दिक्कत बढ़ गई है। अधिकांश क्रिटिकल केस हायर सेंटर रेफर किए जा रहे हैं। यहां की आधी विंग कोटेश्वर शिफ्ट होने से मरीज बेहाल हैं। हालांकि अस्पताल में साफ-सफाई अच्छी है। सीएमएस डॉ.मनोज बडोनी ने स्वीकार किया कि एनेस्थेटिस्ट न होने से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। साथ ही महिला रोग विशेषज्ञ न होने से गर्भवती महिलाओं को दिक्कत उठानी पड़ रही है।

नैनीताल के बीडी पांडेय अस्पताल में टेक्नीशियन न होने से सीटी स्कैन नहीं हो पा रहे। एंबुलेंस तीन हैं पर एक ही ड्राइवर होने से दो खड़ी ही रहती हैं। दोपहर बाद इमरजेंसी में मरीजों को अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे की सुविधा नहीं मिलती। अस्पताल में साफ-सफाई की अच्छी व्यवस्था है। अस्पताल में सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ ही पैथोलॉजी जांच व दवाओं की सुविधा भी उपलब्ध है। अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. केएस धामी ने स्वीकार किया कि टेक्नीशियन नहीं होने के कारण सीटी स्कैन नहीं हो पा रहे।

बालावाला में अस्पताल परिसर में मेडिकल वेस्ट जलने की  जानकारी विभाग के पास है लेकिन कोई कार्रवाई आज तक नहीं हो सकी है । हालांकि अस्पताल में टॉयलेट और फर्श साफ सुथरे हैं । बोर्ड पर 24 घंटे प्रसव सुविधा का दावा है पर स्टाफ ने बताया कि प्रसव नहीं होते। इस संबंध में जब आरएनएस संवाददाता ने जबप्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.रीता भंडारी से बात की तो उन्‍होंने पहले कूड़ा जलाने से इनकार किया लेकिन जब मौके पर कूड़ा जलता देखा तो स्टाफ को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि अस्पताल मेंकूड़ा निस्तारण के लिए पूरी व्यवस्था है।

इसी तरह से बनबसा के प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में न तो सफाई के लिए कर्मचारी है और न ही अन्य स्टाफ। यहां से मामूली चोट वाले मरीजों को भी हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल में अधिकांश दवाइयों का भी अभाव है।  तमाम अभावों के बावजूद अस्पताल को पुरस्कार मिलने से लोग हैरान हैं। बिजली संकट के कारण बीते दिनों यहां वैक्सीन रखने का संकट खड़ा हो गया था। दो दिन पहले ही रात में इमरजेंसी सेवा शुरू गयी है।सिविल अस्पताल रुड़की में छह माह से फिजीशियन और ईएनटी सर्जन नहीं हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ भी एक है, इससे सप्ताह में तीन दिन ओपीडी व तीन दिन ऑपरेशन हो रहे हैं। दस बेड का आईसीयू है पर उसमें स्टाफ नहीं है। अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा भी शुरू हो गई है।
नैनीताल के खैरना अस्पताल सात माह से पानी की दिक्कत है। तीन दिन से तो एक बूंद पानी नही आया। पानी न होने से मरीज व कर्मचारी बाहर से पानी भरकर ला रहे हैं। अस्पताल के कार्यवाहक प्रभारी डॉ.योगेश ने बताया कि इस संदर्भ में अधिकारियों को अवगत कराया गया है।
हालांकि टिहरी के पीएचसी फकोट में 24 घंटे इमरजेंसी सेवा व खून की जांचें हो रही हैं। प्रसव केंद्र भी शुरू हो गया है। दवाएं उपलब्ध हैं। एक्सरे सुविधा भी शुरू हो गई हैं। पौड़ी में पीएचसी कोट को पुरस्कार मिला है। यहां डेंटल यूनिट शुरू हो गई है। अस्पताल को अपग्रेड किया जा रहा है।

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