नौकरी लगवाने और पढ़ाई कराने का झांसा देकर जबरन करवाया मतांतरण

नौकरी लगवाने और पढ़ाई कराने का झांसा देकर जबरन करवाया मतांतरण

देहरादून:-  हिंदू महिला की बेटी को नौकरी लगवाने और तीन नाबालिग नातिनों को पढ़ाने का झांसा देकर मुस्लिम व्यक्ति अपने साथ ले गया। आरोपित ने तीनों नाबालिगों का जबरन मतांतरण करवाकर उनका बिजनौर के चांदपुर स्थित एक मदरसे में दाखिला करवा दिया। नेहरू कालोनी थाना पुलिस ने आरोपित के विरुद्ध उत्तराखंड धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2018 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नानी की सजकता से इस मामले का पर्दाफाश हुआ।

नेहरू कालोनी थाने के एसएसआइ योगेश दत्त के अनुसार, क्षेत्र की एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई कि उनकी बेटी की शादी कबाड़ी मार्केट ब्राह्मणवाला के रहने वाले एक व्यक्ति के साथ नौ साल पहले हुई थी, जिससे उसकी तीन बेटियां हैं।

उनकी उम्र क्रमश: आठ, छह व तीन साल है। पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़ा होता था, जिसके कारण उनकी बेटी एक साल पहले अपने पति को छोड़कर तीनों नातिनों को लेकर मायके आ गई थी। महिला ने बताया कि उनके पड़ोस में एक कबाड़ी की दुकान है, जहां नया गांव (नेहरू कालोनी थाना क्षेत्र) निवासी हाशिम नाम का व्यक्ति कबाड़ बेचने के लिए आता था। हाशिम का संपर्क उनकी बेटी से हो गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार जब बेटी से मिलने उसका पति आता था तो आरोपित हाशिम उसको पीटता और धमकाता था। आरोप है कि हाशिम एक साल पहले उनकी बेटी को नौकरी लगवाने और तीनों नाबालिग नातिनों को पढ़ाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया। बेटी व नाबालिग तीनों नातिनों से मिलने के लिए जब महिला ने हाशिम से पूछा तो वह टालमटोल करने लगा। जब उसने सख्ती से पूछताछ की तो आरोपित ने बताया कि उसने तीनों नाबालिग का चांदपुर स्थित एक मदरसे में दाखिला करवाया है।

इस पर महिला उक्त मदरसे तक पहुंच गई और तीनों नातिनों को अपने साथ देहरादून ले आई। इस दौरान नातिनों ने अपनी नानी को आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि आरोपित हाशिम ने पहले उनका मतांतरण कराया और बाद में उनका दाखिला मदरसे में करवा दिया। नेहरू कालोनी थानाध्यक्ष लोकेंद्र बहुगुणा के अनुसार, तीनों नाबालिग बेटियों और उनकी मां कबाड़ का काम करने वाला हाशिम साथ रह रहे थे।

बेटियों को खुद से अलग करने के लिए उसने उनका मतांतरण कराकर उन्हें चांदपुर भेज दिया। इसके बाद हाशिम ने महिला की नौकरी लगवा दी। दोनों आरोपित बच्चियों से छुटकारा पाकर अलग जिंदगी बसाना चाहते थे, लेकिन बच्चियों की नानी को जब इस बात की भनक लगी तो मामले का पर्दाफाश हो गया।

नेहरू कालोनी थाना पुलिस ने इस मामले में उत्तराखंड धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम 2018 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। जबकि उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक पारित हो चुका है। इस मामले में नोटिफिकेशन भी जारी हो चुका है। अपर पुलिस महानिदेशक वी मुरुगेशन के अनुसार, अब सामूहिक मतांतरण के मामलों में 10 वर्ष तक कारावास के साथ अधिकतम 50 हजार जुर्माना राशि का प्रविधान है।

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