बायोडीजल का अधिकाधिक प्रयोग कर उत्तराखंड में लघु उद्योगों को बढ़ाया जा सकता है, अपार संभावनाएं: डॉ अंजन रे

बायोडीजल का अधिकाधिक प्रयोग कर उत्तराखंड में लघु उद्योगों को बढ़ाया जा सकता है, अपार संभावनाएं: डॉ अंजन रे

देहरादून: बायोडीजल का अधिकाधिक प्रयोग कर उत्तराखंड में लघु उद्योगों को बढ़ाया जा सकता है इसके लिए यहां अपार संभावनाएं हैं, भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के निदेशक डॉ अंजन रे ने आज भारत सरकार तथा (उत्तराखंड काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी) यूकोस्ट के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित वेबीनार में मुख्य वक्ता के रूप में बायोडीजल की संभावनाओं को उजागर करते हुए कहा कि विकास को सतत प्रगति से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

गौरतलब है कि आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के अंतर्गत इस वर्ष को विज्ञान उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है जिसके अंतर्गत देशभर में विभिन्न लोकप्रिय व्याख्यानो का आयोजन किया जा रहा है।
आज के वेबीनार में डॉक्टर देवप्रिया दत्ता सलाहकार सीड डिवीजन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने जहां एक ओर आत्मनिर्भर भारत में उद्योगों की भूमिका पर प्रकाश डाला वहीं दूसरी ओर यूकोस्ट संयुक्त निदेशक डॉ डीपी उनियाल ने उत्तराखंड में उद्योगों के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित किए जाने पर परिषद के प्रयासों से सभी को अवगत कराया।

उत्तराखंड के अग्रणी उद्यमी सीआईआई अध्यक्ष इं. राकेश ओबरॉय ने कहां की स्टार्टअप एवं कौशल विकास से हम आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर हो सकते हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को इस संबंध में एक नया विजन दिया है जिसका लाभ देश के युवा न सिर्फ आत्मनिर्भर बनने में उठा रहे हैं बल्कि औरों के लिए भी रोजगार सृजित कर रहे हैं।
उत्तराखंड उद्योग संघ के अध्यक्ष डॉ पंकज गुप्ता ने कहा कि संस्थानों को अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में और अधिक आगे आना होगा ताकि उद्योगों के लिए नई नई तकनीक विकसित की जा सके।

वेबीनार का संचालन डॉ अपर्णा शर्मा वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी यूकास्ट द्वारा किया गया, वेबीनार में डॉ रश्मि शर्मा वरिष्ठ वैज्ञानिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, साइंस सिटी सलाहकार डॉ जी एस रौतेला, डॉ रोमिला चंद्रा, डॉ आशुतोष मिश्रा, वैज्ञानिक हिमांशु गोयल, जनसंपर्क अधिकारी अमित पोखरियाल, जितेंद्र कुमार, सिद्धांत उनियाल सहित भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, उत्तराखंड काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी(यूकोस्ट) एवं विज्ञान विभाग से जुड़े दर्जनों प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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