स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने ‘मानव तस्करी हेतु जागरूकता दिवस’ के अवसर पर कहा कि “जागरूकता ही मानव तस्करी का समाधान”

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने ‘मानव तस्करी हेतु जागरूकता दिवस’ के अवसर पर कहा कि “जागरूकता ही मानव तस्करी का समाधान”

ऋषिकेश: परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने ‘मानव तस्करी हेतु जागरूकता दिवस’ के अवसर पर कहा कि कोविड-19 महामारी के समय लाखों की संख्या में लोग बेरोजगार हुये है, ऐसे में मानव तस्करी की समस्या और बढ़ी है। भारत सहित वैश्विक स्तर पर बच्चों और भोले-भाले लोगों को प्रलोभन देकर उनकी तस्करी की जा रही है इसलिये स्थानीय स्तर पर रोजगार को बढ़ावा देना होगा, ‘वोकल फॉर लोकल’ के स्वर्णिम उद्योग को हर व्यक्ति को अपनाना होगा तथा जागरूक रहकर कार्य करने के लिये लोगों को खासकर युवाओं को प्रेरित करना होगा क्योंकि इस समय मानव तस्करी की घटनाओं के साथ मानव अंगों की तस्करी के मामलों में वृद्धि हो रही है।

स्वामी जी ने कहा कि जिन लोगों के पास रोजगार नहीं हैं ऐसे समुदायों को देह व्यापार और मानव अंगों की तस्करी आदि से जुड़े अपराधों का शिकार होना पड़ा। अनेक मामलों में घरेलू हिंसा, उपेक्षा, भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक हिंसा भी मानव तस्करी को बढ़ा रही है, इसे कम करने के लिये प्रेम, सद्भाव और मानवतापूर्ण व्यवहार ही सबसे कारगर उपाय है।

 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी

स्वामी जी ने कहा कि हमारे ऋषियों ने ऐसे अनेक सूत्र दिये हैं कि ‘मानव मानव एक समान, सबके भीतर है भगवान’ जिन पर अनुकरण किया जाये तो अनेक समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जायेगा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय द्वारा कोविड-19 महामारी के कारण विश्वभर में मानव तस्करी में वृद्धि की रिपोर्ट जारी की गई है। मानव तस्करी रिपोर्ट, 2021 के अनुसार कोविड-19 महामारी के परिणामस्वरूप मानव तस्करी के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि हुई है।

स्वामी जी ने कहा कि मानव तस्करी का मतलब व्यक्तियों की तस्करी ही नहीं बल्कि यह सम्पूर्ण मानवता के लिये भी खतरा है। वर्तमान समय में श्रम, यौन शोषण के उद्देश्य से बल या धोखे से व्यक्तियों का अवैध परिवहन भी हो रहा है।

स्वामी जी ने कहा कि मानव तस्करी के मामले में पीड़ितों की रक्षा करने और अपराधियों को न्याय दिलाने और मानव तस्करी के खतरे से निपटने के लिये सभी को मिलकर क्षमता निर्माण करना होगा तथा तस्करी के अपराध के बारे में बच्चों को शिक्षित करने हेतु उनके स्कूली पाठ्यक्रम में इन विषयों को शामिल करना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही जनमानस को एक समाज के रूप में जागरूक करना अर्थात् यदि कोई व्यक्ति किसी भी संदिग्ध गतिविधि के साथ सामने आता है, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देना जरूरी है तभी हम समाज से मानव तस्करी जैसे अपराध को खत्म कर सकते है।

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