केंद्र की एडवाइजरी के साथ स्कूलों में खास सतर्कता, संक्रमण फैलने से पूर्व अपनानी होगी कई सावधानियां

केंद्र की एडवाइजरी के साथ स्कूलों में खास सतर्कता, संक्रमण फैलने से पूर्व अपनानी होगी कई सावधानियां

देहरादून:- मुंबई और गुजरात के बाद कोरोना के मामले देश की राजधानी दिल्ली से लेकर नोएडा तक में दहशत आने लगी है। चौथी लहर की संभावना पहले की जताई जा चुकी है जिसमें कहा गया था कि जून के महीने में भारत में चौथी लहर अपना असर दिखा सकती है।

दिल्ली में भी एकाएक संक्रमण के मामले बढ़ने लगे हैं जिसके बाद नोएडा एवं दिल्ली में कोरोना की संभावना को देखते हुए केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी एनसीआर में बच्चों में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बाद जारी की गई है।

दिल्ली एनसीआर ने बच्चों में कोरोना के मामले मिलने के बाद तीन स्कूल बंद किए जा चुके हैं तो वहीं अभिभावकों को साफ कहा गया है कि वह अपने बच्चों में किसी भी प्रकार के लक्षण देखें तो तत्काल इसकी जानकारी स्कूल एवं जिला प्रशासन को दे, इधर दिल्ली में भी कोरोना के मामले एकाएक बढ़ाना काफी चिंताजनक है। राजधानी देहरादून में भी कुछ स्कूलों द्वारा अभिभावकों को बच्चों में बुखार या जुखाम होने के लक्षण दिखाई देने पर स्कूल ना भेजने की अपील की गई है।

दिल्ली और उत्तराखंड के बीच अधिक दूरी नहीं है और नियमित तौर पर लाखों की संख्या में लोग दोनों राज्यों के बीच आवागमन करते हैं। इन परिस्थितियों में कितने दिन तक उत्तराखंड को संक्रमण से रोका जा सकेगा यह एक चिंता की बात है। यूं भी उत्तराखंड में संक्रमण को लेकर अब कोई एहतियात एवं जागरूकता नजर भी नहीं आ रही है। मामले काफी नियंत्रित है तो अधिकांश जिले कोरोना से मुक्त हो चुके हैं, लेकिन यह मान लेना कि उत्तराखंड अब उत्तराखंड कोरोना वायरस से मुक्त हो चुका है, यह अतिशयोक्ति होगी।

उत्तराखंड में सबसे बड़ी दिक्कत यहां की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर है क्योंकि आज भी सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सामान्य बीमारी को लेकर भी उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं है तो संक्रमण जैसे हालातों से निपटने के लिए लोग किन परिस्थितियों से गुजरते होंगे यह आसानी से समझा जा सकता है।

अब क्योंकि चौथी लहर को लेकर संभावनाएं जगने लगी है तो इन परिस्थितियों में यह जरूरी हो गया है कि कोरोना गाइडलाइंस को लेकर राज्य सरकार उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तैयार करें। अभी से प्रयास किए जाएंगे तो संभव है कि क्योंकि लहर से जूझने में एक बड़ी मदद मिल सके।

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