आइए जानते है कौन है 80 और 90 के दशक में अपने हुनर से लोगों का मन मोह लेने वाले जयानंद धौलाखन्डी

आइए जानते है कौन है 80 और 90 के दशक में अपने हुनर से लोगों का मन मोह लेने वाले जयानंद धौलाखन्डी

पौड़ी:- उत्तराखंड में प्रतिभागियों की कमी नहीं है कमी है तो उनके हुनर को पहचानने की आज आपको ऐसे शख्सियत से रूबरू कराते हैं जोकि 80 और 90 के दशक में अपने हुनर से लोगों का मन मोह लेते थे। जी हां पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम सभा सिन्दूडी गांव खेतू के रहने वाले जयानंद धौलाखन्डी शुरू से ही संगीत के इतने बेहतरीन कलाकार है कि उन्होंने अपनी संस्कृति और संस्कृति से जुड़े बाद्य यंत्रों को इस तरह से संजोया की वह खुद ही उसमें इस तरह रम गए कि वह जहां भी शादियां होती वो वहां जाकर अपने उत्तराखंड के प्रसिद्ध मस्कबीन की धुन ढोल दमोऊ और रणसिंहगा के साथ लोगों को अपनी और खींच लेते थे।

इस हुनर को जयनंद धौलाखंडी आज भी जीवित रखे हुए हैं खुद भी जयनंद धौलाखंडी आज भी अपनी कला से लोगों के मन को लुभाते हैं तो वही उनका पुत्र संजय धौलाखंडी भी अपनी इस विरासत को भूल ना पाए और उन्होंने भी अपने पिता के मार्गदर्शन पर चलने के ठानी संजय धोला खंडी एमएबीएड हैं। लेकिन उनके ऊपर भी विरासत का इस कदर से जुनून चला कि उन्होंने शुरुआती दौर में धौलाखंडी बैंड खेतू की शुरुआत की शुरुआत के साथ उन्होंने भी लोगों को अपनी कला से मंत्र मुक्त किया और आज भी लोगों के बीच में वह अपनी कला का अक्सर प्रदर्शन करते हैं। साथ ही संजय धौलाखंडी आज उत्तराखंड के लोक गायक कलाकार के रूप में भी उबर रहे हैं संजय धौलाखंडी अब तक कहीं गाने भी लिख चुके हैं कहीं गाने गा भी चुके हैं जो कि इस तरह से है।

नैणीडाण्डा बजार
थलीसैंण बजार
न पे दारू
खैनि गुटका ख़ाके
भौत ह्वैग्या घटेला -घटेल
मेरी गाड़ी आली
गीत मैंने गाते है

संजय मिलन बैण्ड खेतू उत्तराखंड की लोक संस्कृति में आज से नहीं है बल्कि नवंबर 1978 से है उत्तराखंड की संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है कहते हैं बाप की विरासत बेटा संभालता है कुछ इसी तरह से जयनंद धौलाखन्डी के परिवार में भी देखने को मिल रहा है। जयनंद धौलाखन्डी के बेटे के बाद उनका पोता भी अपने पिता संजय धौलाखन्डी के मार्गदर्शन पर चल रहा है जो कि अभी देहरादून में एनिमेशन का कोर्स कर रहा है। जबकि वह बहुत ही प्यारा प्यानो भी बजाता है इसीलिए कहते हैं खून का रिश्ता कहीं दूर तक अपनी छाप छोड़कर जाता है वही आज जयनंद धौलाखन्डी के परिवार में दिख रहा है।

संजय बैंड खेतू की खास बात यह है कि वह कहीं लोगों को रोजगार भी दे रहा है जहां एक तरफ पहाड़ लगातार खाली हो रहे हैं लोग पलायन करके शहरों की ओर बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ संजय धौलाखन्डी लोक गायक कलाकार अपने गीतों के माध्यम से युवाओं को अपनी टीम में शामिल कर उन्हें रोजगार देने का भी काम कर रहे हैं ऐसे में सरकार को भी चाहिए कि उत्तराखंड के जितने भी लोक गायक कलाकार हैं यह संगीतकार है उनकी तरफ सरकार को अब ध्यान देने की जरूरत है।

News Glint

Related articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.