चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर ने पुलवामा शहीदों के बलिदान को ज़िन्दा रखने की एक छोटी कोशिश की।

चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर ने पुलवामा शहीदों के बलिदान को ज़िन्दा रखने की एक छोटी कोशिश की।

ऋषिकेश: भारत के इतिहास में 14 फरवरी को काला दिन घोषित किया गया है। 14 फरवरी 2019 को हमारे देश के 40 जवान पुलवामा हमले में अपनी मातृभूमि के लिए शहीद हो गए थे। आज इस भारी क्षति की तीसरी बरसी है। पूरे देश भर में इन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी गयी। चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर ने भी उन शहीदों की याद में उनके बलिदान को ज़िन्दा रखने की एक छोटी कोशिश की।

अपनी स्मृतिवृक्ष मुहिम को बरकरार रखते हुए दोनों टीम ने मिलकर पौधा रोपण किया। पुलवामा में शहीद हुए नौजवानों को चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।चलत मुसाफ़िर की संस्थापक मोनिका मरांडी ने कहा ‘इतनी बड़ी क्षति की पूर्ति हम कभी नहीं कर पाएंगे लेकिन हम पर्यावरण को ज़िन्दा रख कर अपना एक योगदान तो दे ही सकते हैं’। वहीं बस्तापैक के संस्थापक गिरीजांश गोपालन ने कहा ‘हम सम्मानित शहीदों की याद को हमेशा सींचते रहेंगे’।

चलत मुसाफ़िर और बस्तापैक एडवेंचर ने मिलकर इस ‘स्मृतिवृक्ष’ की शुरुआत 5 फरवरी 2022 यानी बसंत पंचमी के दिन की थी। इस मुहिम का उद्घाटन पद्म भूषण अनिल नेगी जी के द्वारा किया गया था। इस मुहिम का उद्देश्य अपनी किसी प्रिय की याद में पर्यावरण को ज़िन्दा रखना है। अगर आप भी अपने किसी अपने की याद को ज़िन्दा रखना चाहते है तो चलत मुसाफ़िर को स्मृति वृक्ष लगाने के लिए संपर्क कर सकते हैं।

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